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देश के बारे में चिंता करने को गद्दारी का नाम न दो

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Naseeruddin Shah/  YouTube ScreenGrab BY Gulzar Hussain मैं यह जानता हूं कि नसीरुद्दीन शाह ( Naseeruddin Shah)  की बात का बतंगड़ बनाकर जो चंद कट्टरपंथी संगठन बवाल किए हुए हैं, उनकी बात को गंभीरता से लिया जाना ठीक नहीं है। मुझे यह भी पता है कि नसीर ने देश की स्थिति पर चिंता जताते हुए जो बात कही है, वह कट्टरपंथियों के लिए कोई मुद्दा नहीं है, क्‍योंकि नसीर यदि इससे हट कर कुछ और कहते तो भी उनके विरोध में इसी तरह नफरतवादी गिरोह को आग उगलना ही था। लेकिन यदि वे कुछ और भी कहते, तो भी यह कट्टर गिरोह उन्‍हें ऐसे ही अपमानित करता। मसलन वे यदि बुलंदशहर पर न बोलकर अखलाक या जज लोया पर चिंता जताते या फिर दाभोलकर, गौरी लंकेश, रोहित वेमुला और गोविंद पानसरे को लेकर कुछ कहते तो क्‍या यह कट्टर गिरोह उन्‍हें चैन से रहने देता?  नसीरुद्दीन शाह ( Naseeruddin Shah)  ने बुलंदशहर हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा था कि एक पुलिस इंस्‍पेक्‍टर सुबोध सिंह की हत्‍या से ज्‍यादा गाय पर ध्‍यान दिया जा रहा है। लेकिन यदि वे कुछ और भी कहते, तो भी यह कट्टर गिरोह उन्‍हें ऐसे ही अपमानित करता। मसलन व...

कब कटेगी चौरासी: ज़ख़्म का समंदर समेटे पन्नों से गुजरना

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Book cover/ File photo By Gulzar Hussain 1984 में सिखों के खिलाफ हुए नरसंहार ( 1984 Sikh Genocide)  का सच जानने के लिए पत्रकार जरनैल सिंह की पुस्तक 'कब कटेगी चौरासी : सिख क़त्लेआम का सच' पढ़ना जरूरी है। किसी देश में अचानक अल्पसंख्यकों के खिलाफ इतनी नफरत और हिंसा कैसे भर जाती है, इसका हृदयविदारक चित्रण इस पुस्तक में है। दंगे के दौरान दिल्ली की सड़कों पर अपमानित, प्रताड़ित और निष्प्राण होते जाते सिखों की व्यथा को जरनैल ने बहुत गहराई से रखा है। दरअसल अल्पसंख्यकों के खिलाफ ऐसे नफरत भरे खूनी खेल को देखते हुए बड़े होने वाले हर जनरैल की किताब ठीक ऐसी ही होती। जरनैल ने देखा कि एक भीड़ द्वारा कैसे किसी की पगड़ी उछाल कर अपमानित करते हुए जान ली जा रही है...उसने देखा कि कैसे बच्चों और महिलाओं को भी धर्मान्धों की भीड़ नहीं बख्श रही है।  मैं शहर जब भी जाता तो ऐसी बस्तियों से गुजरता।  बाद में मुझे इस बात पर आश्चर्य होता कि उन खून से रंगे घरों और दुकानों में लोग अब शान्ति से कैसे रह लेते हैं? क्या उन लोगों को कभी यह तड़प नहीं होती कि इन्हीं घरों से कभी किसी को मारपीट कर भगा दिया गया...

In Pics: लहरों के किनारे मुस्‍कुराता गेटवे ऑफ इंडिया

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By Gulzar Hussain मुंबई (Mumbai) में लहरों के किनारे गर्व से खड़ा गेटवे ऑफ इंडिया ( Gateway of India ) सैलानियों के लिए हमेशा से आकर्षण का केंद्र रहा है। इसकी  स्थापत्य  कला की खूबसूरती का दीदार करने दूर- दूर से लोग आते हैं। यहां आकर कुछ लोग नौका विहार का आनंद लेते हैं, तो कुछ लोग समंदर किनारे मुस्‍कुराते गेटवे ऑफ इंडिया को आंखों में बसा लेते हैं। पिछले दिनों मैंने यहां की कुछ तस्‍वीरें ली हैं, जो आपके लिए पेश है।  (All Photos : Gulzar Hussain) Photo by Gulzar Hussain All Photos : Gulzar Hussain

Assembly election: फेल हुई मंदिर- मस्जिद की राजनीति, रोजी- रोटी की बात हो

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प्रतीकात्मक तस्वीर/ File photo दरअसल यह समझना बेहद आसान है कि कौन सी पार्टी किस मुद्दे से बचने के लिए किस मुद्दे का सहारा ले रही है। यह सही है कि भाजपा जब सत्‍ता में आई थी, तो किसानों- खेतिहरों और रोजगार से जुड़ी समस्‍याओं को दूर करना उसके लिए बड़ी चुनौती थी, लेकिन उसने इस चुनौती से मुंह चुराना ही जारी रखा।  Viewpoint  : GuLzar Hussain पांच राज्‍यों में हुए विधानसभा चुनावों ( Assembly election )  में भाजपा की करारी शिकस्‍त सभी पार्टियों के लिए एक सबक भी है। इन चुनाव नतीजों से यह बात तो पूरी तरह साफ हो गई है कि जनता को मंदिर- मस्जिद की राजनीति (Politics) नहीं, बल्कि से रोजी- रोटी की जरूरत पूरी करने वाली सरकारें चाहिए। देश की नई पीढ़ी ने साफ तौर पर यह देखा कि भाजपा ने चुनाव जीतने के लिए कैसे- केसे हथकंडे अपनाए। कभी भाजपा ने मंदिर- मस्जिद के मुद्दे को हवा दी, तो कभी गाय के बहाने एक सांप्रदायिक गोलबंदी करने का प्रयास किया, लेकिन देश की जनता ने सारे व्‍यर्थ मुद्दों वाले गुब्‍बारे की हवा निकाल दी। आखिकरकार जनता ने यह समझ लिया कि भाजपा ने पिछले चार सालों में ऐसा कोई...

चैत्‍यभूमि पर बाबासाहेब आंबेडकर के चाहने वालों का पुस्‍तक प्रेम

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Photo by Gulzar Hussain सबसे अधिक भीड़ शिवाजी पार्क में लगे पुस्‍तक मेले में थी। बाबासाहेब लिखित और आंबेडकरवादी साहित्‍य को खरीदने के लिए लोग लाइन लगा कर खड़े थे। यहां बाबासाहेब की हर प्रसिद्ध पुस्‍तक उपलब्‍ध थीं। मराठी, अंग्रेजी से लेकर हिंदी तक, सभी तरह की किताबें यहां थी और थी उत्‍सुक पाठकों की भीड़।   By Gulzar Hussain मुंबई के दादर रेलवे स्‍टेशन से चैत्‍यभूमि ( Chaitya Bhoomi)   की ओर जाने वाली राह पर दिन भर बाबासाहेब आंबेडकर ( Babasaheb Ambedkar ) के चाहने वालों का तांता लगा रहा। बाबासाहेब के महापरिनिर्वाण दिवस पर दूर- दूर से चैत्‍यभूमि पहुंच कर लोग उन्‍हें श्रद्धांजलि दे रहे थे और जय भीम के नारे लगा कर अपना प्रेम प्रदर्शित कर रहे थे। Photo: Gulzar Hussain चैत्‍यभूमि तक जाने वाली सड़क के दोनों ओर बाबासाहेब की तस्‍वीरें, उनकी प्रसिद्ध किताबें और गौतम बुद्ध की मूर्तियों की दुकानें सजी थीं। लोग खरीदारी करने में व्‍यस्‍त थे। जगह- जगह बिस्‍कुट- चाय के अलावा अन्‍य नाश्‍ते की सामग्री मुफ्त बांटी जा रही थी, ताकि दूर- दराज से आए लोगों को किसी तरह की...

Bulandshahr violence:आदमखोर भीड़ के मुंह इंसान का खून किसने लगाया?

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आदमखोर गिरोह के मुंह इंसान का खून लग गया है, इसलिए यह अखलाक हो या सुबोध, किसी को नहीं बख्‍श रहा है। आखिरकार उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर (Bulandshahr) में फिर यह गिरोह गाय के नाम पर उग्र हुआ और न्‍यायप्रिय इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार सिंह (Subodh Kumar Singh) की खून पीकर ही माना। Symbolic  Photo by  Hasan Almasi  on  Unsplash Viewpoint :  Gulzar Hussain कहते हैं कि आदमखोर जानवर के मुंह एक बार खून लग जाए, तो वह खून का प्‍यासा हो जाता है। ऐसा ही कुछ गाय के नाम पर हिंसा फैलाने वाले गिरोह के साथ हो गया है। इस आदमखोर गिरोह के मुंह भी इंसान का खून लग गया है, इसलिए यह अखलाक हो या सुबोध, किसी को नहीं बख्‍श रहा है। आखिरकार उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर (Bulandshahar) में फिर यह गिरोह गाय के नाम पर उग्र हुआ और न्‍यायप्रिय इंस्‍पेक्‍टर सुबोध कुमार सिंह (Subodh Kumar Singh) की खून पीकर ही माना। यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इस आदमखोर गिरोह के मुंह इंसान का खून लगाया किसने? गाय के नाम पर राजनीति करके अफवाहों की आड़ में इंसानों को मरवाने का सिलसिला शुरू किया किसने? ए...

A Sunset of the City: दादर चौपाटी की रेत पर

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Photo by Gulzar Hussain By Gulzar Hussain घोड़े पर एक छोटी सी लड़की बैठी है...वह जोर जोर से खिलखिला रही है ...घोड़े का लगाम थामे एक युवक उसे समुद्री रेत पर इधर से उधर ले जा रहा है ...रेत पर बैठे लोग भुट्टे और भेलपुरी खाते हुए समंदर की ठंडी हवा का आनंद ले रहे हैं ...कुछ बच्‍चे रेत का महल बना रहे हैं और कुछ बच्‍चे रेत में पैर घुसाकर मुस्‍कुरा रहे हैं ...तभी एक तमाशा दिखाने वाली लड़की मेरे नजदीक आ खड़ी होती है ...मैं उसकी आंखों में पसरा दुख देखने की कोशिश करता हूं ... Photo by Gulzar Hussain Photo by Gulzar Hussain Photo by Gulzar Hussain हां, यह मुंबई का एक प्रसिद्ध समंदर का किनारा है-दादर चौपाटी ( Dadar Chowpatty) । लोग डूबते सूरज को (Sunset) देखने के लिए बेसब्र हुए जा रहे हैं। अब थोड़ी ही देर में सूरज डूबने लगेगा और इसकी चमक फीकी पड़ जाएगी। दादर का समुद्र तट बाबासाहेब आंबेडककर की चैत्‍यभूमि से थोड़ी दूर पर है, तो जो लोग बाबासाहेब की चैत्‍यभूमि पर आते हैं वे समंदर की रेत पर टहलकर सूर्यास्‍त का भी आनंद ले लेते हैं। रेत पर चाट और भेलपुरी की दुकानों के पास ही ग...