...वह रात : लघुकथा
AI Image - शमीमा हुसैन शब्बो और उसका पूरा परिवार उस रात को कभी नहीं भूल पाएगा। वह रात थी ही इतनी भयानक, इतनी दर्दनाक और इतनी बेबस कर देने वाली कि उसकी याद आते ही शब्बो की आँखें नम हो जाती थीं। आसमान में काले बादल छाए हुए थे। रात इतनी घनी थी कि दूर तक कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। बारिश लगातार हो रही थी। कभी बारिश की बूँदें धीरे-धीरे गिरतीं, तो कभी ऐसा लगता जैसे आसमान अपना सारा पानी धरती पर उड़ेल देना चाहता हो। ठंडी हवाएँ चल रही थीं और सड़कों पर पानी भरने लगा था। उसी बारिश भरी रात में शब्बो अपने पति और छोटे-छोटे बच्चों के साथ एक दुकान के बाहर बने छज्जे के नीचे बैठी थी। उनके पास कुछ सामान था, जिसे उन्होंने अपने चारों ओर समेटकर रखा हुआ था। बच्चे थककर वहीं सो गए थे, लेकिन उनके माँ-बाप की आँखों में नींद कहाँ थी! शब्बो कभी अपने बच्चों को देखती, तो कभी अपने पति के चेहरे की ओर। दोनों की आँखों में एक ही सवाल था—आखिर अब क्या होगा? कल तक उनके पास सिर छिपाने के लिए एक छोटा-सा कमरा तो था। वह कमरा भले ही उनका अपना नहीं था, लेकिन उसी में उनका पूरा संसार बसता था। वहीं उनके बच्चे खेलते थे, वहीं वे खान...