आलू प्याज : लघुकथा
AI की सहायता से बनाई तस्वीर। -शमीमा हुसैन मैं उस आदमी को बहुत दिनों से नहीं जानती थी। करीब छह-सात महीने पहले मैं एक दुकान में काम करती थी। वह दुकान मेरे घर से बस 20 मिनट की दूरी पर थी। वहाँ आलू और प्याज बिकते थे। काम सुबह और शाम का था। सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक और शाम 5 बजे से रात 8 बजे तक। मैंने सोचा कि इस समय के हिसाब से काम मेरे लिए ठीक रहेगा। मुझे उस समय पैसों की सख्त जरूरत थी, इसलिए मैंने काम शुरू कर दिया। मुझे लगा कि मैं समय पर जाऊँगी और समय पर घर वापस आ जाऊँगी। लेकिन वहाँ ऐसा नहीं हुआ। मुझे बताए गए समय से पहले बुलाया जाता और तय समय के बाद छुट्टी दी जाती। मैंने सोचा, एक-दो दिन की बात होगी, बाद में सब ठीक हो जाएगा। लेकिन चार-पाँच महीने तक रोज़ इसी तरह मुझसे तय समय से ज्यादा काम लिया गया। मैं एक गरीब मजदूर हूँ। मजदूरी करके अपने परिवार का पेट पालती हूँ। मेरा काम ही मजदूरी करना है। कभी मैं किसी के घर में बर्तन माँजती हूँ, तो कभी किसी अस्पताल या क्लीनिक में सफाई करती हूँ। कभी किसी दुकान में झाड़ू-पोंछा लगाती हूँ, तो कभी किसी दुकान पर सामान बेचने का काम करती हूँ। मेरे काम बदल...