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Showing posts from January 18, 2026

गुलाबी ठंड वाली सुबह : लघुकथा

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  AI  Image  शमीमा  हुसैन  गुलाबी ठंड की वह सुबह कुछ अलग ही थी। हल्की-हल्की ठंडी हवा ऐसे लग रही थी, जैसे पूरे घर में फुहारों की मिठास घोल रही हो। किरन के पास कई काम थे। बेटे के पैंट की चेन टूटी थी, शर्ट का बटन निकला था। इसके अलावा और कई काम हाथ में था, फिर भी किरन सुबह छह बजे से चाय–नाश्ता बनाते हुए ऐसे फुदक रही थी जैसे मौसम ने उसमें नई जान डाल दी हो। आज हर काम जैसे खुद-ब-खुद हो रहे थे। एक हाथ से झाड़ू लगाती तो मन में लगता—चलो, एक कपड़ा भी निचोड़ दूँ। ठंड का मौसम ही ऐसा होता है—उत्साह से भरा हुआ। आठ बजते ही दिल में एक आवाज उठी— “आज गार्डन ज़रूर जाना है।” सप्ताह में दो बार जाना तय था, पर इस हफ्ते एक भी दिन न जा पाई थी। जल्दी-जल्दी सब काम निपटाकर,  और ठंडी हवा के साथ कदम बढ़ा दिए। गार्डन पहुँची तो हवा का पहला झोंका जैसे पूरे तन-मन पर फूल बिखेर गया। किरन ने गहरी साँस ली—मन हल्का हो गया। तभी दूर बेंच पर अफ़सा दिखाई दी। किरन की चाल तेज हो गई। “अस्सलाम अलैकुम!” “वअलैकुम सलाम!” दोनों सहेलियाँ पास-पास बैठ गईं। कुछ ही पल में बातों का सिलसिला खुल गया—घर की बातें, दुन...

इमानदार :लघुकथा

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AI  Image -शमीमा हुसैन  रोमन  एक कारपेंटर हैं। उसके अब्बा भी यही काम करते थे। अब्बा ने बेटे को कभी प्यार से, कभी सख़्ती से यह हुनर सिखाया था। उस कच्ची उम्र में अब्बा की बातें उसे बकवास लगती थीं, लेकिन आज उसे महसूस होता है कि अब्बा की हर बात अनमोल थी। इसी हुनर के बल पर रोमन आज अपना परिवार पाल रहा है। रोमन के तीन लड़कियाँ और एक लड़का है। उसकी कमाई से घर तो चल जाता है, लेकिन पैसा बचता नहीं है। रोमन के पास कोई सेविंग नहीं है। रोमन एक बहुत अच्छा कारपेंटर है। उसकी कला देखकर मन खुश हो जाता है। उसकी कारीगरी की चर्चा पूरे शहर में होती है। वह अपने काम में निपुण है। अब्बा ने उसे एक बात सिखाई थी—“बेटा, ईमानदार रहना, इसी में चैन-सुकून है।” आजकल के ज़माने में सच्चाई को बेकार की चीज़ समझा जाता है, लेकिन रोमन इस नसीहत को गले में पट्टी की तरह बाँधे हुए है। पिछले साल की बात है। शहर के एक सेठ ने उसे काम पर बुलाया और कहा कि हमारे घर का सारा फर्नीचर बना दो, जितना खर्च होगा बता देना। रोमन ने हिसाब लगाया और कहा—तीन लाख रुपये खर्च होंगे। सेठ ने उसे   काम दे दिया और रोमन काम करने लगा। ए...