कोरोना काल
AI Image कोरोना ने जो करना था, वह किया। पति का काम छूट गया। पहले का जमा-पूंजी लॉकडाउन के पहले ही महीने में खत्म हो गया। ऐसी मुसीबत पहले कभी नहीं आई थी। शमीमा हुसैन एक दिन में हुमा भाभी पचास आदमियों का खाना पका लेती है। कोरोना के समय जिंदगी ने उसे जीवन का एक नया पाठ पढ़ाया। वह पाठ नया भी था और बहुत तकलीफदेह भी था। हुमा ने भी वह सबक सीखा। कई दिन ऐसे भी आए जब घर में मुट्ठी भर भी चावल नहीं था। हुमा की एक आदत है—वह बड़ी से बड़ी मुसीबत भी किसी को नहीं बताती। अपनी माँ को भी अपना दुःख नहीं बताती। वह बस एक ही बात याद रखती है—अल्लाह मेरे साथ है। कोरोना ने जो करना था, वह किया। पति का काम छूट गया। पहले का जमा-पूंजी लॉकडाउन के पहले ही महीने में खत्म हो गया। ऐसी मुसीबत पहले कभी नहीं आई थी। आदमी से आदमी बहुत डरने लगा था। दिन भर में हाथ दस बार धोना पड़ता था। तब खाना और पैसे की असली कीमत पता चली। दो दिन से घर में कुछ भी पका नहीं था। बच्चों का भूख से बुरा हाल था। बच्चे टीनएज के थे। हुमा से अपने बच्चों को भूख से बेहाल देखना सहा नहीं जा रहा था। तीसरे दिन वह पड़ोसी के घर चावल माँगने गई। चावल में नमक डालकर...