जनवरी : लघुकथा
AI Image -शमीमा हुसैन रेखा बहुत मेहनती और हिम्मत वाली महिला है। वह लोगों के घरों में काम करती है। सब उसे घर का काम करने वाली बाई कहते हैं। वह चार घरों में काम करती है। रेखा सुबह से शाम तक दूसरों के घरों का काम करती रहती है। घर लौटकर वह अपने घर का काम भी करती है। देर रात तक उसे अपने घर का काम करना पड़ता है। पति से उसे कोई मदद नहीं मिलती थी। इस बात से वह अक्सर चिढ़ जाती थी। पति के इस रवैये से रेखा को बहुत कष्ट होता था। पति कभी काम पर जाता था, कभी नहीं जाता था। पूरे घर की ज़िम्मेदारी रेखा के कंधों पर थी। रेखा दो बच्चों की माँ थी और वह चाहती थी कि बच्चों को कम से कम दसवीं कक्षा तक पढ़ा सके। बच्चे माँ की हालत समझते थे और दोनों माँ की मदद करते थे। रेखा हर घर में मुस्कुराते हुए काम करती थी। अपनी तकलीफ़ वह खुद ही सह लेती थी। दिन भर चार घरों में काम करने के कारण रेखा कई बार बीमार भी रहती थी। पीठ में दर्द, तेज़ बुखार रहने पर भी उसे काम पर जाना पड़ता था। उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। रेखा को मालिकों का गुस्सा और अपमानजनक बातें सहनी पड़ती थीं। कभी भी, किसी भी काम में कमी निकालकर मा...