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Showing posts from November 30, 2025

माँ : लघुकथा

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AI Image शमीमा हुसैन घर में आज फिर कुछ भी राशन नहीं था। कल हमीदा की नानी ने थोड़ा-सा चावल दिया था, उसी का गोलथी बना कर बच्चों को खिलाया और खुद भी खा लिया। [गोलथी- चावल की पतला घोल ] भारी मुसीबत के बीच झाड़ू लगाते हुए उसके आँसू ज़मीन पर गिरते जा रहे थे। तभी उसकी सास जेतुन भीतर आई। वह बोली, “रूहान की माय, सुन! चावल ले, दाल ले, और ये दस रुपया भी रख ले। आलू भी मंगा ले। आज बच्चों को दाल-भात और आलू की भुजिया बनाकर खिला दे। आठ दिन से बेचारे सिर्फ घोलथी खा रहे हैं।” बहू की आवाज़ काँप रही थी, “अम्मा… तेल नहीं है।” जेतुन कुछ पल रुकी, फिर बोली, “अच्छा, समीना को भेज मेरे साथ। दुकान से उधारी में तेल खरीद लूंगी। ये लहसुन के खेत में कमैनी का काम कर के लाई गई मजूरी है — चल, दाल-चावल तो हो जाए।” वह समीना को लेकर दुकान चली गई। मेरी नज़रों में जेतुन एक आयरन लेडी है — जो बड़ी से बड़ी मुसीबत में भी न टूटती है, न रोती है, बस हिम्मत से खड़ी रहती है। यह तीसरी बार है जब उसका बड़ा बेटा पागल हो गया है। जेतुन बनिहारी करके अपना और छोटे बेटे का पेट पालती है। बड़ा बेटा शादीशुदा है और अलग रहता है। पहले भी दो बार बेटा...

अब चाहे जो हो जाए : लघुकथा

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AI Image -शमीमा हुसैन शाम के चार बज रहे थे। आँगन में धूप की आख़िरी किरणें झुक रही थीं और लुना रसोई में पाँच किलो आटा गूँध रही थी। रोटी और चिकन का सालन बनाना था—सबके लिए, हर दिन की तरह। आटा गूँधते हुए अचानक उसे कल की बात याद आ गई। अम्मा जी ने ताना मारा था, “मैं तो कभी लेट नहीं हुई। इसे न जाने कैसे रोज़ लेट हो जाता है?” यह वाक्य चाकू की तरह उसके भीतर उतर गया था। नुकीला, ठंडा और चुभता हुआ। लुना की मुट्ठियाँ तन गईं। गुस्सा जैसे भीतर उबलता हुआ लावा हो—हर शब्द, हर ताना, हर दिन की मजबूरी उसे और तीखा कर देते थे। अपना- पराया का एहसास होता—वह गमला उठाकर ज़ोर से पटक देती है। धनिया, जीरा, काली मिर्च—जो चिकन के लिए उसने अभी-अभी निकाले थे—सब हवा में उड़ाकर ज़मीन पर बिखेर देती   बिखर जाते हैं। और वह चीखती है, “मैं अकेली ही क्यों सबका खाना पकाऊँ? सब लोग खाते हैं, तो सबको काम करना चाहिए! आरा मशीन की कमाई से सबका फ़ायदा है, लेकिन मेरा? शादी को दो साल हुए, और मेरी ज़िंदगी उन्होंने कोयले की भट्टी में झोंक दी है!” कल्पना में ही सही, वह लात-घूँसे से बाल्टियाँ और बर्तन उछाल देती है। पूरे घर में हंगाम...