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चुप्पी की आवाज़ : लघुकथा

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AI Image आज सारा थोड़ी देर से उठी थी, लेकिन इसके पीछे भी एक वजह थी। कल अम्मी बाज़ार से अंगूर लाई थीं। भाई को ज़्यादा अंगूर मिले और सारा को बहुत कम। जब सारा ने हिम्मत करके कहा,“अम्मी, मुझे भी थोड़ा और दे दीजिए,”तो उसे जवाब में डांट और मार मिली। वहीं भाई को बिना कुछ कहे तीन रुपये दे दिए गए। शमीमा हुसैन सारा चुपचाप खड़ी थी।अम्मी की कठोर आवाज़ उसके कानों में गूंज रही थी। “सारा, तुम पूरे दिन बस खाती रहती हो। तुम्हें कोई काम नहीं सूझता। अगर यही आदत रही तो रोज़ मार खानी पड़ेगी।” सारा कुछ नहीं बोली। वह जानती थी कि एक शब्द भी बोलने से अम्मी का गुस्सा और बढ़ जाएगा। वह अभी सिर्फ़ नौ साल की थी, लेकिन इतनी छोटी उम्र में ही उसने चुप रहना सीख लिया था। सारा का भाई उससे दो साल बड़ा था। घर में उसके लिए कोई नियम नहीं थे। वह दिन भर सोए, खेले या खाए—किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। भले ही वह अभी बच्चा था, लेकिन उसे घर में बड़े पुरुष जैसा सम्मान मिलता था। उसकी हर गलती माफ़ कर दी जाती थी। आज सारा थोड़ी देर से उठी थी, लेकिन इसके पीछे भी एक वजह थी। कल अम्मी बाज़ार से अंगूर लाई थीं। भाई को ज़्यादा अंगूर मिले और सा...