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Amritsar train accident: पुलिस ने नहीं दी थी अनुमति, तो कौन है लाशें बिछाने का जिम्‍मेदार?

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आरोप- प्रत्‍यारोप के खेल से पहले यह सुनिश्चित कीजिए कि फिर न हो ऐसा हादसा पंजाब के अमृतसर में दशहरा के दौरान हुए ट्रेन हादसे से जहां पूरा देश स्‍तब्‍ध है वहीं सवाल यह उठ रहे हैं कि इस घटना का जिम्‍मेदार कौन है? इस बीच पुलिस ने यह स्‍वीकार किया है कि जोड़ा फाटक इलाके में दशहरे के कार्यक्रम की अनुमति उसने आयोजकों को नहीं दी थी। जानकारी के अनुसार पुलिस ने आयोजकों को अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया था, लेकिन उसने यह भी माना है कि कार्यक्रम के लिए नगर- निगम की अनुमति की जरूरत थी। अब यह सवाल गहरा जाता है कि पुलिस की अनुमति नहीं होने के बावजूद कार्यक्रम का आयोजन कैसे हुआ? आरोप- प्रत्‍यारोप का दौर तो जारी है, लेकिन क्‍या इन सबसे यह सुनिश्चित हो पा रहा है कि इस तरह का भीषण हादसा दोबारा नहीं होगा। सवाल और छिड़ी राजनीति के बीच जो सबसे अधिक दुखी हैं वे तो मृतकों के परिवार वाले हैं। जिन्‍होंने अपने परिवार के कई- कई सदस्‍यों को खो दिया है, उनके लिए क्‍या राजनीति और कैसे आरोप- प्रत्‍यारोप। फाटक के पास बसे मोहल्‍ले में मातम पसरा है। हर दूसरे घर से रोने और बिलखने की आवाज आ रही है। किसी ने बेटा- ब...

क्‍या कार्यस्‍थलों पर यौन उत्‍पीड़न रोकने में मील का पत्‍थर साबित होगा #MeToo अभियान?

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(Article: Gulzar Hussain) 20 महिला पत्रकारों का यौन शोषण करने के आरोपों से घिरे भाजपाई मंत्री एमजे अकबर के इस्‍तीफे को न्‍याय मांगती स्त्रियों की बड़ी जीत कही जा रही है। इससे यह उम्‍मीद जगी है कि अब कार्यस्‍थलों पर पुरुष बॉस और वरिष्‍ठ सहकर्मियों के उनमुक्‍त यौन दुर्व्‍यवहार पर लगाम लगेगी। Drawing: Gulzar Hussain #MeToo अभियान के तहज एमजे पर आरोप लगाने वाली वरिष्ठ पत्रकार प्रिया रमानी, सुपर्णा शर्मा, सबा नकवी और गज़ाला वहाब सहित प्राय: सभी स्त्रियों ने इस इस्‍तीफे को बड़ी सफलता बताते हुए खुशी जाहिर की है।हालांकि इस मुद्दे पर अभी कोर्ट का फैसला आना शेष है फिर भी इस इस्‍तीफे ने एक सकारात्‍मक राह तो तैयार कर ही दी है। प्रिया रमानी ने ट्विटर पर लिखा है, "एमजे अकबर के इस्तीफे से हमारे आरोप सही साबित हो गए हैं।हमें उस दिन का इंतज़ार है, जब हमें कोर्ट में इंसाफ मिलेगा।" दरअसल #MeToo अभियान के तहत जो स्‍त्रियों में एकजुटता दिखी है, वही इस अभियान की बड़ी ताकत है। प्रसिद्ध नारीवादी सीमोन द बुवा ने 'द सेकंड सेक्‍स' में लिखा है कि स्त्रियों में कहीं भी एकजुटता नहीं होती...

#MeToo: सच के सहारे आत्‍मसम्‍मान की लड़ाई, प्रिया रमानी के समर्थन में सोशल मीडिया पर उठी आवाज़

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यौन शोषण के आरोप से बौखलाए भाजपाई मंत्री और पूर्व संपादक एमजे अकबर की ओर से पत्रकार प्रिया रमानी पर मानहानि का मुकदमा किए जाने के बाद सोशल मीडिया में तूफान मच गया है। 97 वकीलों के सहारे प्रिया के आरोपों को झूठा साबित करने की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर लड़कियों और न्‍यायप्रिय पुरुषों ने प्रिया के समर्थन में खुलकर लिखना शुरू कर दिया है। ट्विटर से लेकर फेसबुक तक यौन शोषण के खिलाफ नारेबाजी बुलंद होती जा रही है। ज्‍यादातर पोस्‍ट भाजपा के उस रूख के खिलाफ है, जिसमें वह एमजे अकबर का बचाव करती दिखाई दे रही है। दरअसल एमजे की ओर से कानूनी कार्रवाई के बाद प्रिया रमानी ने जो बयान दिया है वह नई पीढ़ी की लड़कियों के लिए क्रांति की मशाल की तरह है। प्रिया ने कहा है कि,  'मैं अपने ख़िलाफ़ मानहानि के आरोपों पर लड़ने के लिए तैयार हूं। सच और केवल सच ही मेरा बचाव है।' इस तरह अब स्त्रियों के आत्‍मसम्‍मान की यह लड़ाई सच के सहारे लड़ी जा रही है। Drawing: Gulzar Hussain  लोग सवाल पूछ रहे हैं कि यदि भाजपा बेटी के उज्‍ज्‍वल भविष्‍य की बात करने वाली पार्टी है, तो वह अपने मंत्री एमजे को बचाती क्...

#MeToo के तहत बोल रही हैं लड़कियां, गौर से सुनिए

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(Article: Gulzar Hussain) लड़कियां बोल रही हैं, लेकिन कुछ लोगों को उनकी आवाज़ आज खल रही है। दरअसल लड़कियों ने पुरुषों की ओर से बनाए पुरुषवादी किले की नींव में सेंध लगा दी है, जिससे किले के गिरने का खतरा पैदा हो गया है, इसलिए इससे कुछ लोगों को डर लगने लगा है। #MeToo के तहत लड़कियों ने अपनी आपबीती से सोशल मीडिया को भर दिया है, जिससे कई पुरुषों के भोले- भाले चेहरे वाले मुखौटे हट गए हैं और डरावना चेहरा सामने आ गया है। Drawing: Gulzar Hussain लड़कियों की आपबीती बेहद डरावने पुरुषवादी यातना शिविरों से रू-ब-रू कराती है। यह सदी की सबसे डरावनी हॉरर फिल्‍म से भी भयावह है, जिसमें लड़कियों के जिस्‍म की तरफ बढ़ते बड़े नाखूनों वाले हाथ हैं, लेकिन इन हाथों को रोकने वाला कोई अवतारी धर्म-पुरुष इस पूरे परिदृश्‍य में नहीं है। लड़कियों के जिस्‍म की तरफ बढ़ते हुए ये हाथ किसी ड्रैकुला के नहीं, बल्कि अपने रिश्‍तेदारों, दोस्‍तों, अपरिचितों, बॉसों, सहकर्मियों के हैं। मासूम लड़कियों को ये खूनी हाथ लहूलुहान कर रहे हैं और उसके अपने भी चुपचाप खड़े तमाशा देख रहे हैं। इस आंदोलन ने फिल्‍म और राजनीति...

क्‍या ISI के लिए जासूसी के आरोपी निशांत अग्रवाल की करतूत से हो सकता है देश को खतरा?

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#BrahMos_engineer_arrested ➤ देश की सुरक्षा से खिलवाड़  ➧विश्‍लेषण पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए जासूसी करने के आरोप में नागपुर से गिरफ्तार वैज्ञानिक निशांत अग्रवाल ने देश को ऐसी स्थिति में ला दिया है, जो बेहद डरावना है। यदि ISI को अग्रवाल ने सुपरसोनिक मिसाइल सिस्टम की जानकारी दे दी है, तो यह भारत की सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकता है। गिरफ्तार  आरोपी निशांत अग्रवाल  ब्रह्मोस मिसाइल का महत्‍व देश की सुरक्षा के लिए ब्रह्मोस मिसाइल का महत्‍व बहुत ज्‍यादा है। दरअसल यह एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी इस्‍तेमाल किया जा सकता है। ऐसे में यदि जासूसी के आरोपी अग्रवाल ने इससे जुड़ी सूचनाएं लीक की हैं, तो पाकिस्‍तान इसका नाजायाज फायदा उठा सकता है। कई कागजात मिलने से उठे सवाल गिरफ्तार किए गए आरोपी निशांत के घर से ब्रह्मोस से जुड़े कई जरूरी गोपनीय दस्तावेज मिलने की खबर है, जिससे चिंता बढ़ जाती है। गौरतलब है कि अग्रवाल ब्रह्मोस मिसाइल प्रॉजेक्ट नागपुर यूनिट में सीनियर सिस्टम इंजीनियर है, ज...

इंसानियत का परचम लहराते 'दोस्‍ती' के गाने

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फिल्म 'दोस्ती' के लिए मजरूह सुल्‍तानपुरी के लिखे इस गाने में जितना दर्द छलकता दिखाई देता है, उतना ही मानवीय प्रेम का ऐलान भी सुनाई पड़ता है। यह गाना इंसान को इंसान के प्रति हमदर्दी रखने का पहला सबक याद दिलाता है। पहली पंक्ति में ही गीतकार कहता है कि 'मैं तुम्‍हारी तरह एक इंसान हूं।'  BY  Gulzar Hussain "जाने वालों जरा मुड़ के देखो मुझे, एक इंसान हूं, मैं तुम्हारी तरह..." यह केवल फिल्मी गाना नहीं है, बल्कि मजरूह की कलम से उतरी वह हकीकत है, जिसे सदियों से इंसान अपने मन में बसाए है। दरअसल 'मैं भी इंसान हूं' कहना उन कट्टरपंथी समूहों के लिए एक जवाब भी है जो इंसान को इंसान मानने से इनकार करते रहे हैं। वर्तमान में जब दुनियाभर के ताकतवर-कट्टर समूह इंसान को जानवरों से भी कमतर आंक रहे हैं , तब इस गाने का महत्व उभर कर सामने आता है। 'दोस्ती' फिल्म गाने का यादगार दृश्य फिल्म 'दोस्ती' के लिए  मजरूह सुल्‍तानपुरी के लिखे इस गाने में जितना दर्द छलकता दिखाई देता है, उतना ही मानवीय प्रेम का ऐलान भी सुनाई पड़ता है। यह गाना इंसान को इंसान के प...

क्‍या बलात्‍कार के खिलाफ प्रतीक बन पाएंगी नादिया?

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आईएस (ISIS terrorists) के खौफनाक शिकंजे में कई महीनों तक यातना झेलने वाली यजीदी महिला कार्यकर्ता नादिया मुराद को इस साल नोबेल शांति पुरस्‍कार दिया गया है। यह पुरस्‍कार खास इसलिए है कि नादिया न केवल बलात्‍कार के खिलाफ लगातार आवाज उठाती रही हैं, बल्कि उन्‍होंने खुद स्‍त्री विरोधी अत्‍याचार की हद को झेला भी है। इसलिए यह उम्‍मीद बंधती हैं वह और मुखर होकर रेप के खिलाफ आवाज बुलंद कर पाएंगी। वे तीन महीने तक आईएस के क्रूर आतंकियों के भीषण जुल्‍म का शिकार हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और यौन उत्पीड़न के खिलाफ एक ठोस आवाज बनकर उभरी। गौरतलब है कि 2014 में आईएस के क्रूर आतंकियों ने बंधक बनाकर उनका रेप किया था। Nadia: From Slave To Nobel Laureate/ Drawing: Gulzar Hussain  जागरूकता फैलाई नादिया ने बलात्‍कार और अन्‍य यौन अपराधों (sexual violence) के खिलाफ लोगों में बहुत जागरूकता फैलाई है। आज जब पूरे विश्‍व में स्‍त्री अपराधों के खिलाफ एक चुप्‍पी का माहौल दिखाई दे रहा है, तब नादिया का प्रतिरोध बेहद महत्‍वपूर्ण हो जाता है। वे अपनी आपबीती सुनाकर पूरी दुनिया को जाग...