अधूरी नहीं मैं : लघुकथा


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-नायला अदा


भूरी आंखों वाली शमा को हमेशा दौड़ना पसंद था। कॉलेज के दिनों में वह एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेती थी। उसके सपने भी उसकी रफ्तार जैसे थे-बड़े और चमकदार।


लेकिन एक बरसाती शाम उसकी जिंदगी बदल गई। घर लौटते समय एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसकी स्कूटी को टक्कर मार दी। कई घंटों के ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि शमा के दोनों पैर बचाए नहीं जा सके।


जब उसे होश आया और उसने अपने पैरों की जगह खाली बिस्तर देखा, तो लगा जैसे उसकी पूरी दुनिया खत्म हो गई हो। कई महीनों तक वह कमरे में बंद रही। लोगों की सहानुभूति उसे दया जैसी लगती थी। रिश्तेदार कहते, "अब इसकी जिंदगी कैसे कटेगी?"


एक दिन उसकी मां ने उसकी पुरानी डायरी उसके सामने रख दी। शमा ने पन्ने पलटे। उनमें उसकी कविताएं, कहानियां और सपने लिखे थे। उसी रात उसने फिर से लिखना शुरू किया।


धीरे-धीरे शब्द उसके नए कदम बन गए। वह व्हीलचेयर पर बैठकर घंटों लिखती। उसकी पहली कहानी एक पत्रिका में छपी तो पाठकों के सैकड़ों पत्र आए। फिर पहला उपन्यास आया, फिर दूसरा। कुछ ही वर्षों में शमा देश की चर्चित लेखिकाओं में गिनी जाने लगी।


सफलता के साथ विवाह के प्रस्ताव भी आए। लेकिन शमा ने शादी न करने का फैसला किया। उसे लगता था कि वह अपने लेखन और स्वतंत्र जीवन में पूरी तरह संतुष्ट है।


इसी दौरान उसकी मुलाकात आरव से हुई, जो एक पुस्तक मेले में उसकी किताब पर हस्ताक्षर लेने आया था। वह शमा की प्रसिद्धि नहीं, उसके विचारों का प्रशंसक था। दोनों की बातचीत शुरू हुई और धीरे-धीरे एक गहरा रिश्ता बन गया।


एक दिन आरव ने कहा, "मैं तुमसे प्यार करता हूं।"


शमा मुस्कराई, "लेकिन मैं शादी नहीं करना चाहती।"


आरव ने जवाब दिया, "मैंने शादी का प्रस्ताव नहीं दिया। मैंने सिर्फ अपने दिल की बात कही है।"


उस दिन शमा की आंखें भर आईं। पहली बार उसे महसूस हुआ कि प्रेम हमेशा किसी बंधन का नाम नहीं होता।


वर्षों बाद भी शमा और आरव साथ थे-बिना किसी औपचारिक रिश्ते के। शमा लिखती रही, आरव पढ़ता रहा। लोग अक्सर पूछते, "तुम्हारी जिंदगी में सबसे बड़ी कमी क्या है?"


शमा हंसकर कहती, "मेरे पैर नहीं हैं, यह सच है। लेकिन मेरी जिंदगी में कोई कमी नहीं है। मैंने अपने सपनों को चलना सिखा दिया है।"


और सचमुच, जिन पैरों को एक दुर्घटना ने छीन लिया था, उनकी जगह अब उसके शब्द दुनिया भर में सफर कर रहे थे।

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