एक मौका : लघुकथा

 

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...जब इंसान अपने ही जुड़े हुए लोगों को माफ नहीं कर पाता, तो रिश्ता सड़ने लगता है और उसमें से बदबू आने लगती है। चाहे जीवन कितना भी आधुनिक क्यों न हो, लेकिन उस घर में दोनों अजनबियों की तरह रहने लगे थे। (इसी कहानी से)


शमीमा हुसैन

नफीसा और सलमान की एक खूबसूरत जोड़ी थी। नफीसा आधुनिक विचारों वाली महिला थी। शादी के दिन से ही वह घर को अपने तरीके से चलाती आ रही थी। नफीसा अपने कपड़ों से लेकर बर्तनों तक सब कुछ आधुनिक रखना पसंद करती थी। इसी बात को लेकर सास और बहू में अक्सर तकरार हो जाती थी। जिस घर को नफीसा कुछ सालों से संभाल रही थी, उस घर को उसकी सास कई दशकों से चला रही थीं।


सास का कहना था कि नफीसा का दिमाग खराब हो गया है, वह फिजूल खर्ची करती है। लेकिन नफीसा का मानना था कि हमें नए समय के साथ जीना चाहिए और पुरानी चीजों को बदल देना चाहिए। नफीसा के सारे कपड़े वेस्टर्न थे, इस बात से भी सास को खीज होती थी।


नफीसा पिछले कुछ सालों से अपनी एक दुकान भी चला रही थी। इस बात पर भी घर में एतराज़ होता था। सास कहती थीं कि जब अल्लाह का दिया सब कुछ है तो काम करने की क्या ज़रूरत है। लेकिन नफीसा का कहना था कि उसका भी अपना वजूद है और वह आत्मनिर्भर रहना चाहती है।


नफीसा घर और काम दोनों को अच्छी तरह संभालती थी। घर में एक तोता भी पाला हुआ था, जिसकी देखभाल सब मिलकर करते थे।


एक दिन नफीसा बिल्ली का खाना लेने बाजार गई। रास्ते में सलमान की फैक्ट्री पड़ती थी। नफीसा के मन में ख्याल आया कि क्यों न सलमान को सरप्राइज़ दिया जाए। सलमान अपने केबिन में ही था। नफीसा बिना नॉक किए ही केबिन में चली गई।


लेकिन अंदर जो उसने देखा, उसे देखकर उसके शरीर का खून जैसे जम गया। वह मिट्टी की मूर्ति की तरह खड़ी रह गई और सलमान को देखती रह गई।


इस घटना को कई साल हो गए, लेकिन नफीसा उस दृश्य को आज तक भूल नहीं पाई। तकिए पर पड़े कपड़े और सलमान का हाथ कहाँ था — यह सब उसकी यादों में आज भी ताज़ा है। नफीसा आज तक सलमान को माफ नहीं कर पाई।


जब इंसान अपने ही जुड़े हुए लोगों को माफ नहीं कर पाता, तो रिश्ता सड़ने लगता है और उसमें से बदबू आने लगती है। चाहे जीवन कितना भी आधुनिक क्यों न हो, लेकिन उस घर में दोनों अजनबियों की तरह रहने लगे थे।


इस बड़े हादसे के बाद भी सलमान को कोई शर्म नहीं हुई। उल्टा वह नफीसा पर ही पलटवार करने लगा। जब नफीसा इस बारे में बात करती, तो सलमान कहता कि वह उसे रखे हुए है और जीवन के सारे सुख दे रहा है।


नफीसा ने कहा कि उस औरत को काम से हटा दिया जाए। सलमान ने जवाब दिया कि कुछ दिन रुक जाओ, फिर बात करेंगे।


अब रोज़-रोज नफीसा और सलमान में झगड़े होने लगे। नफीसा का सलमान पर भरोसा टूट चुका था। उसकी आंखों के सामने देखा हुआ दृश्य उसके दिल में हमेशा के लिए बस गया था।


सलमान भी बदल गया था। वह छोटी-छोटी बातों पर नफीसा को ताने देने लगा — कभी कहता दाल में नमक ज्यादा है, कभी पूछता कि सब्जी क्यों बनाई, चिकन क्यों नहीं बनाया।


धीरे-धीरे दोनों के बीच नफरत बढ़ने लगी। सलमान अपनी गलती मानने को तैयार नहीं था और मर्दानगी का घमंड दिखाता रहता था।


नफीसा इस सब से अंदर से टूट गई थी, लेकिन सलमान पर इसका कोई असर नहीं हुआ। वह मानो पत्थर का बना इंसान बन गया था।

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