कम्पनी : लघुकथा

 

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-शमीमा हुसैन 

जब मैं कम्पनी गई तो मुझे अजीब लगा। गेट पर दरवाज़ा छोड़कर, दरवाज़े के दोनों साइड बड़े-बड़े बोरे भरकर रखे हुए थे। पाँच-सात चालियों के बाद कम्पनी थी। आसपास कोई भी दुकान नहीं थी। कम्पनी की दीवार ऊँची और लम्बी थी, जिससे चोरी की संभावना कम लगती थी।


गेट के अंदर जाते ही एक तरफ बहुत-सी कपड़ों की बड़ी-बड़ी गठरियाँ रखी हुई थीं। दूसरी तरफ दीवार से सटा हुआ एक बड़ा टेबल था। उस टेबल के पास एक महिला और एक लड़की खड़े होकर शर्ट की मार्किंग कर रही थीं। दूसरी साइड में दस-बारह सिलाई मशीनें लगी थीं, जिन पर सिलाई मास्टर बैठकर काम कर रहे थे। उसी लाइन में बटन लगाने की मशीन थी, जिस पर माजिद बैठकर बटन लगा रहा था।


मैं माजिद के पास जाकर बोली,

“माजिद, कैसी उजाड़ कम्पनी है, कैसे मन लगता है यहाँ?”


माजिद हँसने लगा और बोला,

“भाभी, चाय मंगाता हूँ।”


मैं भी ज़ोर से हँस पड़ी और बोली,

“कभी बाद में चाय पिऊँगी, आज नहीं। आज तो कम्पनी देखने आई हूँ—माजिद कैसे काम करता है।”


मैं कम्पनी देखने में व्यस्त हो गई। मशीनों की खटर-पटर की आवाज़ मिलकर एक शोर में बदल गई थी, क्योंकि एक साथ दस-बारह मशीनें चल रही थीं।


माजिद ने कहा,

“भाभी, ऊपर भी चलें?”


मैं बोली,

“चलो, दिखाओ।”


माजिद मुझे ऊपर ले गया। ऊपर   सिला हुआ कपड़ा पैक हो रहा था। एक जगह दो महिलाएँ पैकिंग कर रही थीं, दूसरी जगह भी दो महिलाएँ पैक कर रही थीं। एक-दो आदमी भी काम में लगे थे, लेकिन ऊपर महिलाओं की संख्या ज़्यादा थी।


ऊपर से हम फिर नीचे आ गए। जिस टेबल पर मार्किंग का काम हो रहा था, मैं उसे देखने लगी। माजिद वापस अपनी बटन लगाने वाली मशीन पर चला गया।


मैंने माजिद से पूछा,

“माजिद, बाहर जो बोरे रखे हैं, उनमें क्या है?”


माजिद बोला,

“भाभी, बाहर के बोरे में कतरन है। कतरन भी बिक जाती है।”


मैं कम्पनी से बाहर निकल आई और सोचने लगी—आदमी रोटी के लिए कितना मेहनत करता है।


माजिद और हम एक ही चाली में रहते थे। माजिद की अम्मा बहुत भली औरत थीं। वह कम्पनी से माल लाकर घर पर सिलाई का काम करती थीं। उन्होंने हमें कई बार समझाया,

“दिन भर घर में पड़ी रहती हो, मेरे साथ चलो। माल लाकर बनाओ, हजार-पंद्रह सौ रुपये महीना आ जाएगा।”


मैं हँसकर टाल देती—“अच्छा, बाद में।”


एक रात चाली में ज़ोर से हल्ला हुआ। हम सब घर से बाहर निकले तो देखा—सब लोग माजिद के घर की तरफ भाग रहे थे। मैं भी उसके घर गई। घर में पुरे  चाली जमा थी। पता चला कि माजिद ने ज़हर खा लिया है।


क्यों?


कम्पनी में जो मार्किंग वाली लड़की थी, माजिद उससे प्यार करता था। लेकिन लड़की ने इंकार कर दिया। इसी वजह से माजिद ने ज़हर खा लिया।


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