पापा का पर्स : लघुकथा

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शमीमा हुसैन

 एक छोटा लड़का था, नाम था राहुल। एक दिन उसने दुकान की खिड़की में एक सुंदर खिलौना देखा। वह खिलौना उसे बहुत पसंद आया और उसका मन उसे खरीदने का हो गया, पर उसके पास पैसे नहीं थे। 

घर आकर उसने देखा कि पापा का पर्स मेज पर रखा है। उसने छुपकर पर्स से कुछ पैसे निकाल लिए और खिलौना खरीद लिया। लेकिन, खिलौना मिलने के बाद भी राहुल को खुशी महसूस नहीं हुई।

 उसे अंदर से बेचैनी होने लगी, पापा के चेहरे को देखकर उसे बहुत पछतावा हुआ। तभी उसे आत्मज्ञान हुआ कि जो उसने किया वह गलत था। उसने तुरंत पैसे निकाले और वापस पर्स में रख दिए।

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