दिल पे चलाईं छुरियां : लघुकथा
AI Image - शमीमा हुसैन वह बहुत अच्छा नाचती थी। बहुत अच्छा खाना बनाती थी और बाइक भी अच्छी तरह चला लेती थी। घर का हर काम उसे आता था। लोग भी कहते थे कि वह सब कुछ बहुत अच्छा करती है। फिर भी न जाने क्यों उसका घर नहीं बस सका। उसका नाम शादी से पहले परी था। लेकिन शादी के बाद उसका नाम बदलकर उषा रख दिया गया। वह पी. टी. उषा नहीं थी, लेकिन काम करने में पीटी उषा से कम भी नहीं थी। उसकी शादी एक ऐसे परिवार में हुई, जहाँ घर में लगभग दस लोग थे। दस लोगों का खाना बनाना, सबके कपड़े धोना, बर्तन साफ करना और घर के बाकी सारे काम करना-वह सब अकेले करती थी। सुबह से रात तक लगातार काम करती रहती और थककर चूर हो जाती। लेकिन घरवालों को कभी यह ख्याल नहीं आया कि वह भी इंसान है और उसे भी आराम की जरूरत है। अगर उससे छोटी-सी भी गलती हो जाती, तो उसे मार पड़ती। उसकी सास उसे मारती थी। कभी-कभी पति भी मारता था—कभी कम, कभी ज्यादा। कभी तो देवर भी हाथ उठा देता था। घर के लगभग सभी लोग उसे मारते-पीटते और गालियाँ देते, और वह चुपचाप सब सहकर फिर अपने काम में लग जाती। आखिर क्यों? सिर्फ इसलिए कि वह एक औरत थी? इन मर्दों को तो सच ...